55 Suhagrat : कुंवारे जमाई राजा की खौफनाक कहानी : 55 सुहागरात मनाई, कई परिवार किए बर्बाद, रुह कंपा देने वाली दास्तां !

55 Suhagrat : राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की लोककथाएं जहां वीरता और प्रेम की मिसाल पेश करती हैं, वहीं इसी धरती में एक ऐसी डरावनी सच्ची कहानी भी दबी है, जिसने दशकों तक ग्रामीण समाज को दहशत में रखा। यह कहानी है ‘कुंवारे जमाई राजा’ के नाम से कुख्यात जीयाराम की—एक ऐसा शातिर अपराधी, जो रिश्तों की आड़ लेकर सुहागरात के नाम पर घरों में घुसता, दुल्हनों को धोखा देता और सुबह होते-होते सोना-चांदी व इज्जत दोनों लूटकर फरार हो जाता।
रिश्तों की आड़ में रची गई खौफनाक साजिश
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जीयाराम का तरीका बेहद मनोवैज्ञानिक और वीभत्स था। वह बाड़मेर और आसपास के रेतीले, दूर-दराज गांवों में उन घरों को निशाना बनाता, जहां हाल ही में शादी हुई हो और नई दुल्हन पहली बार मायके आई हो।
दिन में वह घर की रेकी करता और यह सुनिश्चित करता कि पुरुष सदस्य बाहर हों। रात ढलते ही वह खुद को ‘जमाई राजा’ बताकर घर में दाखिल होता।
सुहागरात के नाम पर दिया गया धोखा
बिजली की कमी, घूंघट प्रथा और सामाजिक संकोच का फायदा उठाकर जीयाराम आसानी से परिवार का भरोसा जीत लेता। उसे असली दामाद समझकर घरवाले उसकी आवभगत करते।
रात के सन्नाटे में वह नई दुल्हन के कमरे तक पहुंचता, लोक-लाज के कारण कोई शक नहीं करता । नई नवेली दुल्हनों के साथ सुहागरात मनाता और जैसे ही सभी गहरी नींद में सो जाते, वह दुल्हन के गहनों के साथ घर की तिजोरी साफ कर चुपचाप फरार हो जाता।
सुबह होते-होते पीछे रह जाता था लुटा हुआ घर, टूटे रिश्ते और सदमे में डूबी एक मासूम दुल्हन।
17 केस दर्ज, असल पीड़ित 55 से ज्यादा!
राजस्थान पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जीयाराम के खिलाफ चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और छेड़छाड़ के 17 मामले दर्ज थे।
लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह थी। ग्रामीण समाज में बदनामी और लोक-लाज के डर के कारण कई परिवारों ने शिकायत ही दर्ज नहीं कराई। अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि उसके शिकार 55 से ज्यादा परिवार और महिलाएं थीं, जिनमें से कई ने यह दर्द पूरी जिंदगी चुपचाप सहा।

हिस्ट्रीशीटर बनने से मौत तक का सफर
जीयाराम का नाम पहली बार 1988 में चौहटन थाने में दर्ज हुआ। इसके बाद 1990 से 1996 के बीच उसने सिणधरी, समदड़ी, धोरीमन्ना और चौहटन क्षेत्रों में वारदातों की झड़ी लगा दी।
साल 1994 में उसे आधिकारिक रूप से ‘हिस्ट्रीशीटर’ घोषित किया गया। वह बार-बार जेल गया, लेकिन बाहर आकर फिर वही घिनौना खेल दोहराता रहा।
लगातार अपराध और जेल जीवन ने उसकी सेहत तोड़ दी। फेफड़ों की गंभीर बीमारी के चलते 2016 में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
आज भी जिंदा है खौफ की छाया
जीयाराम तो मर गया, लेकिन उसकी काली यादें आज भी राजस्थान के उन रेगिस्तानी गांवों में जिंदा हैं। कई इलाकों में लोग आज भी रात को सोने से पहले दरवाजे-खिड़कियां बार-बार जांचते हैं।
यह कहानी एक सख्त चेतावनी है कि कैसे समाज की परंपराओं और भरोसे का गलत फायदा उठाकर एक अपराधी दशकों तक इंसानियत को शर्मसार करता रहा।











